मंदिर

कैलाश मंदिर

एटा शहर में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा दिलसुख राय बहादुर ने करवाया था। मंदिर निर्माण के साथ ही इसके आसपास के पूरे क्षेत्र का नामकरण भी कैलाशगंज हो गया है। धरातल से इस मंदिर की चोटी तक की ऊँचाई करीब 200 फुट है, जबकि भगवान शिव की चतुर्मुखी मूर्ति धरातल से लगभग 125 फुट की ऊंची है। भगवान शिव की मूर्ति सफेद पत्थर से बनी हुई है, और साथ ही नन्दी की मूर्ति भी स्थापित है, जो कि सफेद पत्थर से निर्मित है। यहां स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा चौमुखी है। भगवान शिव की मूर्ति के उत्तर और दक्षिण की ओर, क्रमशः भगवान गणेश और मां पार्वती की मूर्ति स्थापित है। मंदिर की छत पर अजंता और एलोरा जैसी नक्काशी देखने को मिलती है। इसके साथ ही, यहां एक झील भी बनी हुई है, जो मंदिर के आंगन में स्थापित है। इस झील में जाने के लिए सीढ़ियों का भी निर्माण कराया गया है। मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए, श्रद्धालुओं को लगभग 108 सीढ़ियां चढ़नी होती है, जो हर 70 फीट पर 3 भागों में बंटा हुआ है।

शिवरात्री मेला

फाल्गुन माह में शिवरात्रि महापर्व और श्रावण मास के दौरान मंदिर में मेले लगते हैं, इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, सावन के पूरे माह में पड़ने वाले सोमवार को भक्तों की विशेष भीड़ रहती है। सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के दौरान भक्तजन कांवरों में गंगाजल भरकर कोसों दूर की लम्बी पदयात्रा करके कैलाश मंदिर में शिवाजी का जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं।

मंदिर के बारे में कुछ प्रमुख तथ्य

  • किवदंती के अनुसार कैलाश मंदिर के नीचे एक सुरंग है जो कासगंज तक खुदी थी, सुरंग का द्वार मंदिर के ठीक नीचे है लेकिन सुरंग का द्वार सालों से बंद है, जिसके कारण किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है की सुरंग कहाँ तक जाती है।
  • पूरे विश्व में यही एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव की चौमुखी मूर्ति स्थापित है।
  • पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भगवान शिव की सबसे विशाल प्रतिमा है।

दरगाह सय्यद हसनशाह वारसी

जनपद एटा के मौहल्ला मारहरा गेट-पोता नगला में महान सूफी सन्त सैय्यद हसरशाह वारसी रहमतुल्लाअलैह व हाजी खैरावाती शाह वारसी रहमतुल्ला शाह की कफी पुरानी दरगाह है जिस पर प्रतिदिन सैकड़ों की मात्रा में हर धर्म के आस्थावान पुरूष व स्त्रियां आती हैं तथा इनमें से कुछ रात्रि निवास भी करते है चुंकि आने वाले भक्तों की मुरादें पुरी होती हैं तो यहां जाने व ठहरने का सिलसिला निरंतर जारी है। प्रत्येक वर्ष यहां मुहर्रम का मेला लगता है।

नसिया जैन मंदिर

प्रसिद्ध जैन मंदिरों में से एक, नसिया जैन मंदिर, एटा जिले के शिकोहाबाद रोड पर स्थित है।

साई मंदिर:

एक प्रसिद्ध साई मदंरि, एटा की ठंडी सड़क पर स्थित है। यह मंदिर साई भक्तों के बीच काफी प्रख्यात है और हर बृहस्पतिवार को यहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा भाव से दर्शन के लिए आते हैं। इसके अतिरिक्त कभी-कभी यहां भजन संध्या, महा आरती, विशाल भोग आदि जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं, जिसमें भक्त बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

अर्श गुरुकुल यज्ञ तीर्थ

अर्श गुरुकुल यज्ञ तीर्थ एटा में स्थित है, जो कि विश्व में सबसे बड़ी यज्ञ शाला मानी जाती है। यह 84 खंबों पर स्थित है। यहां बच्चों को शिक्षित करने हेतु शिक्षा के प्राचीन सिद्धांतों को अपनाया जाता है, साथ ही यहां संस्कृति, आध्यात्मिक प्रथाओं और संस्कृत को भी बढ़ावा दिया जाता है। यहां की हरियाली और स्वच्छ वातावरण मन को मोह लेगा और अपनी ओर आकर्षित करने लगेगा। एटा में यह एक ऐसी जगह है, जहां लोग गुरुकुल में बिना किसी उम्र बाधा के आते हैं, और वार्षिक यज्ञ समारोह और अन्य कार्य़क्रमों में हिस्सा लेते हैं, और साथ ही आध्यात्मिकता के वातावरण का आनंद उठाते हैं।

सोरों (गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि)

कांसगंज में स्तिथ सोरों, एक प्राचीन जगह है। यहां पर विभिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि, यह वह जगह है जहां गोस्वामी तुलसी दास ने अपने गुरु नरहरिदास से पौराणिक कथा “रामायण” सुनी थी। यहां एक बलदेव मंदिर भी स्थापित है, जो कि एटा के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। इसके साथ ही, यहां विभिन्न प्राचीन स्तूप भी स्थापित हैं, जहां भगवान सीता-राम के मंदिर स्थापित हैं।